नंदा देवी राजजात: आस्था से लेकर आंसू तक — एक रहस्यमयी बिदाई
उत्तराखंड की 12 साल में एक बार होने वाली हिमालयी यात्रा, जिसमें माँ नंदा को कैलाश के लिए विदा किया जाता है और चार सींग वाला मेढ़ा सबसे आगे चलता है।
नंदा देवी राजजात उत्तराखंड की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं में से एक है, जो परंपरागत रूप से लगभग हर 12 वर्ष में आयोजित होती है। मान्यता है कि यह यात्रा माँ नंदा को उनके मायके से उनके ससुराल — कैलाश — के लिए विदा करने की यात्रा है।
चमोली ज़िले से शुरू होकर यह यात्रा कठिन पहाड़ी रास्तों और ऊँचे बुग्यालों से होकर गुज़रती है। यात्रा का नेतृत्व एक चार सींग वाला मेढ़ा — चौसिंगा खाडू — करता है, जिसे यात्रा के अंतिम पड़ाव पर हिमालय की ओर अकेले विदा कर दिया जाता है।
इस डॉक्यूमेंट्री में
- आस्था: माँ नंदा की विदाई से जुड़ी मान्यताएँ और परंपराएँ।
- यात्रा: कठिन पर्वतीय रास्ता और उसके पड़ाव।
- रहस्य: चौसिंगा खाडू की विदाई — क्या मान्यता है और क्या देखा गया है, दोनों अलग-अलग।
